जोधपुर
बाल विवाह से मिली मुक्ति: 12 साल की उम्र में ब्याही, बालिका वधु को अब अनचाहे बंधन से मिली आजादी

बाल विवाह के शिकंजे में जकड़ी दो बालिका वधुओं पूजा व शीला को आखिरकार सारथी ट्रस्ट की डॉ.कृति भारती के संबल से बाल विवाह के अभिशाप से मुक्ति मिल गई। पारिवारिक न्यायालय संख्या 3 के न्यायाधीश शंकरलाल मारू ने सोमवार को बालिका वधु पूजा और शीला के बाल विवाह निरस्त का ऐतिहासिक फैसला सुनाया। जिसके बाद पूजा व शीला के खुशी के आंसू छलक पड़े।
पूजा 12 साल की उम्र में ब्याही, धमकियों का सामना किया
ड्राइवर की पुत्री करीब बीस वर्षीय पूजा जांदू का बाल विवाह महज 12 साल का उम्र में वर्ष 2014 में समाज के दबाव में कर दिया गया था। बाल विवाह के कारण पूजा को खुद के भविष्य संवारने के ख्वाब टूटते नजर आए। करीब 8 साल तक पूजा ने बाल विवाह की पीड़ा भोगी। इस बीच जाति पंचों व अन्य की ओर से लगातार गौना करवाने के लिए दबाव बनाया जाता रहा। उसे और परिजनों को बहुत धमकियां लगतार झेलनी पड़ी।
पूजा बीए कर चुकी है। कॉलेज जाते समय भी हर पल भय बना रहता। इसके कारण कॉलेज भी नियमित नहीं जा पाई। इस बीच पूजा को जोधपुर के सारथी ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी की बाल विवाह निरस्त की मुहिम के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद पूजा ने डॉ. कृति भारती से बाल विवाह निरस्त के लिए सम्पर्क किया। डॉ.कृति भारती ने पहले पूजा के परिजनों को काउंसलिंग कर पूजा के फैसले में सहयोग देने के लिए पूरी तरह से सहमत किया। इसके बाद डॉ कृति भारती ने जोधपुर के पारिवारिक न्यायालय में पूजा के बाल विवाह निरस्त का वाद दायर किया। वाद दायर करने के बाद भी समाज के लोगों ने दबाव बनाए रखा।
शीला 7 साल में बाल विवाह के बंधन में बंधी, 9 साल दंश झेला
दैनिक मजदूर की पुत्री 16 वर्षीय शीला (बदला हुआ नाम) का बाल विवाह 7 साल की आयु में बाल विवाह हुआ था। बाल विवाह के बाद शीला व उसके परिजनों पर समाज का काफी दबाव रहा। जिस पर शीला ने सारथी ट्रस्ट की डॉ.कृति भारती से स्कूल के एक ओरिएंटेशन कार्यक्रम में मुलाकात की और बाल विवाह की पीड़ा बयां की। जिस पर डॉ.कृति ने शीला को संबल दिया। वहीं उसके घर वालों की समझाइश कर बाल विवाह निरस्त में सहयोग के लिए राजी किया। वहीं बाद में डॉ. कृति के साथ शीला ने पारिवारिक न्यायालय में बाल विवाह निरस्त का वाद दायर किया। डॉ.कृति ने कोर्ट को बाल विवाह निरस्त के तथ्यों और दस्तावेजों से अवगत करवाया।
सारथी के संबल से बाल विवाह से मुक्ति
डॉ.कृति भारती ने पूजा और शीला के साथ पेश होकर न्यायालय को बाल विवाह संबंधी तथ्यों और दस्तावेजों से अवगत करवा पैरवी की। जिसके बाद पारिवारिक न्यायालय संख्या 3 के न्यायाधीश शंकरलाल मारू ने बालिका वधु पूजा के 8 साल पहले महज 12 साल की उम्र में हुए बाल विवाह और बालिका वधु शीला के 7 साल की उम्र में हुए बाल विवाह को निरस्त करने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया। इसके साथ ही समाज को बाल विवाह के खिलाफ खड़ा संदेश दिया।
पीडिता पूजा ने कहा कि मैं प्रशासनिक अधिकारी बनना चाहती हूं। बाल विवाह से मुक्ति मिली है अब अपना जीवन अपने तरीके से गुजारुंगी। शीला ने बताया कि में पढ लिख कर खुद के पैरों पर खड़ी होऊंगी। खुद के सपनों को साकार कर पाऊंगी। सारथी ट्रस्ट, जोधपुर मैनेजिंग ट्रस्टी व पुनर्वास मनोवैज्ञानिक डॉ. कृति भारती ने बताया कि पूजा और शीला का बाल विवाह निरस्त होने के बाद अब उसके बेहतर पुनर्वास के प्रयास किए जा रहे है। पूजा व शीला के सपनों को साकार करने की दिशा में सहयोग किया जा रहा है।
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