दिव्या मदेरणा रेप पीड़िता के पक्ष में उतरीं: बोलीं- मंत्री के बेटे पर राजस्थान पुलिस ने दर्ज क्यों नहीं की FIR?

जलदाय मंत्री महेश जोशी के बेटे रोहित जोशी के खिलाफ दिल्ली के सदर बाजार थाने में रेप का केस दर्ज होने के बाद अब कांग्रेस में ही विरोध के सुर उठने लगे हैं। ओसियां से कांग्रेस विधायक और पूर्व जलदाय मंत्री महिपाल मदेरणा की बेटी दिव्या मदेरणा रोहित जोशी के खिलाफ और पीड़िता के पक्ष में उतर गई है। दिव्या मदेरणा ने चार ट्वीट करके राजस्थान पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पीड़िता के परिवार को सुरक्षा देने की पैरवी की है। दिव्या ने राजस्थान में केस दर्ज नहीं करने पर भी सवाल उठाए हैं।
दिव्या मदेरणा ने ट्वीट किया– राजस्थान सरकार ने 1 जून 2019 से थानों में मामला दर्ज नहीं करने पर SP ऑफिस में FIR दर्ज करने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने फरियादी का मामला दर्ज करने से मना करने पर संबंधित थानेदार के खिलाफ विभागीय जांच करने के भी निर्देश दिए थे। सदर बाजार थाने में दर्ज जीरो नंबर FIR अभी जांच के अधीन है। मेरा पुलिस प्रशासन से गंभीर प्रश्न है कि यह FIR राजस्थान पुलिस ने क्यों नहीं दर्ज की? DGP को FIR दर्ज करने से मना करने वाले थानेदार के खिलाफ तत्काल विभागीय जांच के आदेश देने चाहिए।
दिव्या ने आगे लिखा- DGP और राजस्थान पुलिस को पीड़िता व उसके परिवार को उनके राजस्थान के पैतृक निवास पर सुरक्षा उपलब्ध करवानी चाहिए। हमारी सरकार बहुत संवेदनशील है, लेकिन पुलिस को त्वरित एक्शन लेना चाहिए। इस केस ने राजस्थान पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दिव्या मदेरणा के सवाल उठाने के सियासी मायने
कांग्रेस विधायक दिव्या मदेरणा के महेश जोशी के बेटे के खिलाफ खड़े होने से अब जलदाय मंत्री पर उनकी ही पार्टी में सवाल उठने से जोड़कर देखा जाएगा। इसे महेश जोशी पर इस्तीफा देने का प्रेशर बनाने से जोड़कर देखा जा रहा है। खुद की पार्टी के विधायक के सवाल उठाने से अब महेश जोशी पर उनके विरोधी और आक्रामक होंगे।

विधानसभा में महेश जोशी को रबर स्टैंप मंत्री बताया था
दिव्या मदेरणा ने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान जलदाय की अनुदान मांगों पर बहस के दौरान मंत्री महेश जोशी को जमकर घेरा था। क्षेत्र में पानी के कामों में भेदभाव बरतने और विधायक की राय नहीं लेने पर दिव्या ने नाराजगी जताई थी। उन्होंने विधानसभा में कहा था कि जलदाय मंत्री महेश जोशी शहर से आते हैं, ग्रामीण क्षेत्र की पानी की समस्या जानते भी नहीं है। अफसर विभाग चला रहे हैं, मंत्री तो रबर स्टैंप हैं।
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